माँ लक्ष्मी जी की आरती—धन, सौभाग्य, वैभव, प्रसन्नता और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी—सनातन धर्म में अत्यंत पूजनीय मानी जाती हैं। घर में शांति, सम्पन्नता और सकारात्मक ऊर्जा के लिए माता की पूजा तथा आरती बहुत प्रभावशाली मानी जाती है, विशेषकर शुक्रवार और दिवाली के दिन।
इस लेख में आप जानेंगे:
- माँ लक्ष्मी कौन हैं?
- लक्ष्मी जी की आरती का महत्व
- पूरी आरती के बोल
- प्रत्येक पंक्ति का सरल अर्थ
- पूजा विधि (Step-by-step)
- शुक्रवार और दिवाली पर आरती का विशेष फल
- लाभ, सावधानियाँ, FAQs और अधिक
सामग्री-सूची (Table of Contents)
Table of Contents
लक्ष्मी माता कौन हैं? (Who is Maa Lakshmi?)
माँ लक्ष्मी का स्वरूप
- धन, सौभाग्य और समृद्धि की देवी
- भगवान विष्णु की सहचारिणी
- उनकी चार भुजाएँ जीव के चार पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष—का प्रतीक हैं
- हाथों से बहती हुई सोने की मुद्राएँ निरंतर धन और कृपा का संकेत देती हैं
लक्ष्मी जी के प्रमुख रूप
माँ लक्ष्मी के अष्टलक्ष्मी के रूप प्रसिद्ध हैं:
- आदि लक्ष्मी
- धन लक्ष्मी
- धान्य लक्ष्मी
- गजलक्ष्मी
- संतन लक्ष्मी
- वीर लक्ष्मी
- विजय लक्ष्मी
- विद्यालक्ष्मी
हर रूप भक्त को जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आशीर्वाद प्रदान करता है।
लक्ष्मी जी की आरती का महत्व
1. आध्यात्मिक महत्व
- माता की आरती करने से घर में भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि आती है।
- आरती का प्रकाश अंधकार, नकारात्मक ऊर्जा और अशुभता को हटाता है।
2. लाभ
- धन-संबंधी बाधाओं में कमी
- व्यापार में उन्नति
- घर में शांति, सौहार्द और सौभाग्य
- मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास
3. कब करें आरती?
- प्रातः और संध्या
- शुक्रवार
- दिवाली (महालक्ष्मी पूजा)
- पूर्णिमा और अष्टमी के दिन भी अत्यंत शुभ
लक्ष्मी जी की आरती (Hindi Lyrics)
॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
ऊँच सिंहासन बिराजत,**
लोक मायें को सूहाती।
प्रेम भक्ति से जो कोई,
सुमिरत नित पाती॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम धनी, तुम बुद्धि दाता,
तुम ही हो सुखदाता।
कर्ता हो तुम सबकी,
सब विधि की विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दीनन की तुम सहाय,
निधि की तुम हो दाता।
जो कोई तुमको ध्यावे,
रिद्धि सिद्धि पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दूध, मेवा और मिठाई,
चढ़त है श्रधा से।
रूप लो तुम बारम्बार,
भक्तों की इच्छा से॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जो भी नर-नारी,
आरती गुनगाते।
उन्हें कभी भी जीवन में,
दारिद्र्य न सताते॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥
आरती का अर्थ (Meaning Line-by-Line)
“ॐ जय लक्ष्मी माता”
– माँ लक्ष्मी को प्रणाम, जो हर जीव को सुख और समृद्धि देती हैं।
“तुमको निशिदिन सेवत हरि विष्णु विधाता”
– भगवान विष्णु भी आपकी पूजा करते हैं; आप सृष्टि की पालनकर्ता देवी हैं।
“तुम धनी, तुम बुद्धि दाता”
– आप धन, बुद्धि और वैभव का स्रोत हैं।
“दीनन की तुम सहाय”
– गरीब, दुखी और संकट में पड़े लोगों की रक्षक आप ही हैं।
“जो कोई तुमको ध्यावे, रिद्धि सिद्धि पाता”
– आपकी भक्ति से जीवन में हर प्रकार की सफलता प्राप्त होती है।
लक्ष्मी माता पूजा विधि (Step-by-Step Puja Vidhi)
पूजा सामग्री (Samagri List)
- लाल या पीला आसन
- गंगा जल
- अक्षत (चावल)
- रोली, कुमकुम
- लाल फूल, कमल
- घी या तेल का दीपक
- धूप, कपूर
- मिठाई / खीर / फल
- चाँदी/पीतल का सिक्का
पूजा के चरण
- स्नान करके साफ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान पर लक्ष्मी जी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
- गंगा जल छिड़ककर स्थान पवित्र करें।
- दीपक जलाएँ।
- कुमकुम व अक्षत चढ़ाएँ।
- फूल और प्रसाद अर्पित करें।
- लक्ष्मी मंत्र का जाप करें:
“ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः” - अंत में आरती करें—दीपक को गोल-गोल घुमाते हुए।
- परिवार के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।
शुक्रवार और दिवाली पर विशेष महत्व
शुक्रवार
- देवी लक्ष्मी का दिन
- धन वृद्धि और संघर्षों में कमी
- व्यापार, नौकरी और नई शुरुआत के लिए शुभ
दिवाली (महालक्ष्मी पूजा)
- लक्ष्मी जी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं
- स्वच्छ और प्रकाशमय घर में प्रवेश करती हैं
- आरती करने से घर में लाखों गुना अधिक शुभ फल मिलता है
Did You Know?
दिवाली की रात को “प्रदीपदान” से लक्ष्मी स्थायी रूप से घर में वास करती हैं।
लाभ (Benefits of Lakshmi Aarti)
- आर्थिक बाधाओं का नाश
- व्यापार/नौकरी में उन्नति
- घर में शांति और सौहार्द
- मानसिक शांति
- सकारात्मक ऊर्जा
- रिश्तों में मधुरता
- धन-धान्य की वृद्धि
करने योग्य और न करने योग्य बातें
करें
- स्वच्छता रखें
- लाल/पीले पुष्प चढ़ाएँ
- घी का दीपक जलाएँ
- आरती करते समय मन एकाग्र रखें
न करें
- पूजा जल्दबाज़ी में न करें
- जूठे हाथों से प्रसाद न छुएँ
- घर गंदा न रखें—माँ लक्ष्मी को साफ-सफाई प्रिय है
- विवाद/क्रोध के तुरंत बाद पूजा न करें
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. लक्ष्मी जी की आरती कब करनी चाहिए?
सुबह और शाम दोनों समय, तथा शुक्रवार और दिवाली पर विशेष रूप से।
2. क्या रोज़ आरती करने से धन लाभ होता है?
हाँ, नियमित आरती जीवन में स्थायी समृद्धि लाती है।
3. दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें?
संध्या समय दीपक, पुष्प, धूप, मंत्र-जाप और आरती के साथ पूरी विधि से।
4. क्या लक्ष्मी जी तेल का दीपक पसंद करती हैं?
घी का दीपक सर्वोत्तम माना जाता है।
5. क्या कमल का फूल अनिवार्य है?
जरूरी नहीं, परन्तु अत्यंत शुभ।
6. क्या घर गंदा होने पर पूजा कर सकते हैं?
लक्ष्मी जी स्वच्छता की अधिष्ठात्री हैं—साफ घर में पूजा अधिक फलदायी।
7. क्या शुक्रवार को व्रत रखकर आरती करनी चाहिए?
हाँ, बहुत शुभ माना जाता है।
8. क्या शाम को आरती करना ज्यादा लाभ देता है?
संध्या आरती अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
लक्ष्मी जी की आरती न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि जीवन में धन, सुख, शांति, वैभव और सौभाग्य लाने का दिव्य साधन है।
नियमित भक्ति, स्वच्छता और श्रद्धा से माता अवश्य प्रसन्न होती हैं।
“लक्ष्मी माता की कृपा से आपके जीवन में सदैव समृद्धि, सौभाग्य और शांति बनी रहे।
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