सोहगरा धाम (बाबा हंसनाथ मंदिर): यूपी-बिहार सीमा पर स्थित अद्भुत शिवधाम की विस्तृत कथा

पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार की सीमा पर, छोटी गंडक नदी के शांत किनारे बसा सोहगरा धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लोकआस्था, पौराणिक इतिहास और ग्रामीण संस्कृति का जीवंत संगम है। देवरिया जिले के अंतिम छोर पर स्थित यह धाम एक अनोखी भौगोलिक विशेषता भी रखता है—मंदिर का कुछ भाग उत्तर प्रदेश में […]

तरकुलहा देवी मंदिर, आस्था, वन और स्वतंत्रता का एक पवित्र स्थान

पूर्वी उत्तर प्रदेश की मिट्टी में एक अलग ही तरह की गंध है—यहाँ खेतों की हरियाली है, भोजपुरी लोकगीतों की मिठास है और साथ ही स्वतंत्रता की उस चिंगारी की स्मृति भी है जिसने 1857 में पूरे क्षेत्र को आंदोलित कर दिया था। इन्हीं स्मृतियों और आस्थाओं के बीच स्थित है तरकुलहा देवी मंदिर, जो […]

गोरखपुर का रहस्यमयी झारखंडी महादेव मंदिर: जहाँ कुल्हाड़ी के वार से पत्थर से बहा था रक्त

पूर्वी उत्तर प्रदेश का शहर गोरखपुरसिर्फ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन मंदिरों और लोकविश्वासों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन्हीं मंदिरों में से एक हैझारखंडी महादेव मंदिर,जिससे जुड़ी रहस्यमयी घटनाएँ और लोककथाएँ आज भी लोगों को आश्चर्यचकित कर देती हैं। यह मंदिर भगवान शिव के भक्तों के लिए आस्था […]

बुढ़िया माई मंदिर, गोरखपुर: कुसम्ही के घने जंगलों में बसी एक रहस्यमयी शक्ति की कहानी

गोरखपुर सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि आस्थाओं का एक बड़ा कोलाज है। जहाँ एक तरफ गोरखनाथ मंदिर की भव्यता है, वहीं दूसरी तरफ शहर की भीड़भाड़ से दूर, कुसम्ही के घने और ऊंचे ‘साल’ के पेड़ों के बीच बसा है— बुढ़िया माई का मंदिर। यदि आप इस मंदिर के इतिहास, यहाँ के चमत्कारों और यहाँ […]

गोरखनाथ मंदिर: भारतीय अध्यात्म, योग परंपरा और आस्था का महाकुंभ

गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर का सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है और नाथ संप्रदाय का प्रमुख केंद्र माना जाता है। एक मंदिर, एक शहर और एक जीवंत परंपरा उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित गोरखपुर शहर अपनी पहचान के लिए किसी परिचय का मोहताज नहीं है। लेकिन इस शहर के नाम और […]

हनुमान जी के चमत्कारी तथ्य | बजरंगबली से जुड़े अद्भुत, रहस्यमय और प्रेरणादायक सत्य

हनुमान जी सनातन धर्म के उन दिव्य स्वरूपों में से हैं, जिन्हें केवल एक पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि भक्ति, बल, बुद्धि, सेवा और त्याग का जीवंत आदर्श माना जाता है। वे भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं और रामायण में उनकी भूमिका केवल युद्ध-कौशल तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म, विवेक और निस्वार्थ कर्म का मार्गदर्शन […]

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 – सांख्ययोग (ज्ञानयोग)

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 (यह अध्याय 72 श्लोकों का है) यह अध्याय गीता का हृदय कहलाता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के मोह, करुणा और भ्रम का नाश करते हुए उसे कर्तव्य, आत्मा का स्वरूप, कर्मयोग, समत्वयोग, और ज्ञानयोग की शिक्षा देते हैं। श्लोक 1 सञ्जय उवाच ।तं तथा कृपयाऽविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् ।विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥ 1 ॥ […]